लालगोपालगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मौत को दावत देता गड्ढा
लालगोपालगंज प्रयागराज स्थानीय रेलवे स्टेशन पर शाम होते स्टेशन परिसर में अंधेरे का राज हो जाता है बिजली जाने के बाद प्रकाश की नही है कोई उत्तम व्यवस्था जिससे स्टेशन परिसर पर आपराधिक वारदातों की संभावना बनी रहती है और यात्री डर के मारे इधर उधर की दुकानों पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करते हैं
तार से जकड़ा स्टेशन परिसर में बना शौचालय
स्टेशन परिसर में शौचालय की कोई व्यवस्था नही है एक शौचालय है भी तो उसको लोहे के तार से जकड दिया गया है आलम यह है कि स्टेशन परिसर में बड़े बड़े गड्ढे खुदे है जो सीधे मौत को दावत दे रहे है और यात्री के बैठने के लिए लगी लोहे की कुर्सी भी जर्जर पड़ी हुई है जिससे यात्री को जमीन पर बैठकर गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है
यात्रीओ का आरोप है स्टेशन प्रबंधक आये दीन यात्री से दुर्व्यवहार करते है इस लिए किसी न किसी से नोक झोक होते देखा जाता है स्वच्छता अभियान के बावजूद भी स्टेशन परिसर में किसी भी स्टेशन परिसर पर जर्जर पड़ी बैठने की
प्रकार के सफाई व्यवस्था नहीं है प्लेटफार्म की नियमित सफाई ना होने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है मिनरल वाटर आरओ की सुविधा ना होने के कारण यात्रियों को नल का बदबूदार गंदा पानी ही पीना पड़ता है कई लाख रुपए साल का राजस्व देने वाला लालगोपालगंज स्टेशन आज भी बदहाली पर आंसू बहा रहा है आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है स्टेशन परिसर पर साफ सफाई की समुचित व्यवस्था ना होने के कारण प्लेटफार्म पर गंदगी का अंबार लगा रहता है
स्टेशन अधीक्षक के साए से स्टेशन पर अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता है जिससे आए दिन यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है स्टेशन परिसर पर एक जर्जर शौचालय है जिसमें किसी प्रकार की सफाई व्यवस्था नहीं है दूर से ही शौचालय की बदबू आने लगती है जिससे पूरे स्टेशन का वातावरण प्रदूषित रहता है रेलवे स्टेशन प्रशासन की लापरवाही की मार झेल रहा है कुछ यात्रियों का आरोप है जब स्टेशन अधीक्षक से किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करना चाहते हैं तो वह अभद्र व्यवहार कर भगा देते हैं जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश जाहिर है स्टेशन अधीक्षक के मनमानी रवैया से परेशान लोगों ने डीआरएम समेत उच्चाधिकारियों से शिकायत की मांग लिया है
लालगोपालगंज प्रयागराज स्थानीय रेलवे स्टेशन पर शाम होते स्टेशन परिसर में अंधेरे का राज हो जाता है बिजली जाने के बाद प्रकाश की नही है कोई उत्तम व्यवस्था जिससे स्टेशन परिसर पर आपराधिक वारदातों की संभावना बनी रहती है और यात्री डर के मारे इधर उधर की दुकानों पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करते हैं
तार से जकड़ा स्टेशन परिसर में बना शौचालय
स्टेशन परिसर में शौचालय की कोई व्यवस्था नही है एक शौचालय है भी तो उसको लोहे के तार से जकड दिया गया है आलम यह है कि स्टेशन परिसर में बड़े बड़े गड्ढे खुदे है जो सीधे मौत को दावत दे रहे है और यात्री के बैठने के लिए लगी लोहे की कुर्सी भी जर्जर पड़ी हुई है जिससे यात्री को जमीन पर बैठकर गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है
यात्रीओ का आरोप है स्टेशन प्रबंधक आये दीन यात्री से दुर्व्यवहार करते है इस लिए किसी न किसी से नोक झोक होते देखा जाता है स्वच्छता अभियान के बावजूद भी स्टेशन परिसर में किसी भी स्टेशन परिसर पर जर्जर पड़ी बैठने की
प्रकार के सफाई व्यवस्था नहीं है प्लेटफार्म की नियमित सफाई ना होने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है मिनरल वाटर आरओ की सुविधा ना होने के कारण यात्रियों को नल का बदबूदार गंदा पानी ही पीना पड़ता है कई लाख रुपए साल का राजस्व देने वाला लालगोपालगंज स्टेशन आज भी बदहाली पर आंसू बहा रहा है आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है स्टेशन परिसर पर साफ सफाई की समुचित व्यवस्था ना होने के कारण प्लेटफार्म पर गंदगी का अंबार लगा रहता है
लालगोपालगंज स्टेशन पर ध्वस्त पड़ा शौचालय






































