Tuesday, 10 December 2019

गांव के लाल का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में हुआ चयन, गांव की गलियों से सीखा क्रिकेट का ककहरा ,अपने दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता में हुआ चयन


गांव के लाल का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में हुआ चयन
गांव की गलियों से सीखा क्रिकेट का ककहरा ,अपने दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में बनाई जगह


 लालगोपालगंज प्रयागराज गांव की माटी से निकला एक और हीरा क्रिकेट की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवा बिखेरने के लिए तैयार है उसका चयन मूक बधिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता में  हुआ है भारत और श्रीलंका के बीच आयोजित तीन वनडे और एक ट्वेंटी कोलंबो में 28 जनवरी से 3 फरवरी के बीच आयोजित किया गया है जिसमें खेलने के लिए गांव का लाल कोलंबो के स्टेडियम पर उतरेगा  उसके चयन से पूरे गांव और क्षेत्र में जश्न का माहौल है

घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है परिवार तो फूला नहीं समा रहा है नवाबगंज थाना क्षेत्र के पियरी गांव निवासी  मंजूर हुसैन जो फौज में रहकर देश की सेवा करते थे उनके दो बेटे और पांच बेटियों में छोटा मुंतजीर हुसैन 23 जन्म से ही मूकबधिर था जो प्रयागराज के जार्जटाउन स्थित मूक बधिर स्कूल से हाईस्कूल के शिक्षा ग्रहण किया और वह शुरू से ही क्रिकेट का दीवाना था गांव की माटी से उपजे इस बेटे ने पहले जिला फिर प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा का जौहर मनवाया इस बीच उसका चयन अंतरराष्ट्रीय मूकबधिर क्रिकेट प्रतियोगिता में हुआ तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा इससे  साफ जाहिर होता है कि जोश और जुनून के आगे शारीरिक विकलांगता कोई मायने नहीं रखती है इसे इलाके के एक होनहार युवक ने सच साबित कर दिखाया है मंगलवार को मुंतजीर के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया वालिद मंजूर हुसैन भाई मुर्शीद हुसैन मोहम्मद आफाक आदि ने फूल मालाओं से होनहार को लाद दिया मूकबधिर मुंतजीर भी इशारों में लोगों से अपनी खुशियां बांट रहा था मुंतजीर के बड़े भाई मुर्शीद ने बताया कि भारत और श्रीलंका के मध्य कोलंबो में आयोजित तीन एक दिवसीय मैच 28 जनवरी से 3 फरवरी के बीच आयोजित है 
 बेटा मुंतजीर फारुकी ने गांव की गलियों से क्रिकेट का ककहरा सीखा और अपने दृढ़ संकल्प एवं कड़ी मेहनत के दम पर पहले डिस्टिक फिर स्टेट और आज  अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट टीम में अपनी जगह बनाया है 


        मां की दुलार और पुचकार ने मुंतजीर को दिया हौसला

मुंतजीर के पिता मंजूर हुसैन सेना से रिटायर हैं बड़ा बेटा मुर्शीद ईट भट्टे का व्यापार करता है जबकि मुंतजीर गूंगा और बहरा होने से सबका लाड़ला था पिता मंजूर हमेशा उसे अपने से दूर खेलकूद में जाने से रोकते थे जबकि मां मोहसिना उसकी शौक का पूरा ख्याल रखती थी बाप की असहमति के बगैर मुंतज़िर ने अपनी अलमारी में दर्जनों मेडल इकट्ठा कर लिया था इसकी उन्हें भनक तक नहीं लग सकी लेकिन मां के दुलार ने मुंतजीर को जो हौसला दिया के उनके पिता मंजूर सोच भी नहीं सके



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